अकथ कहानी संघर्ष की – ज्योतिराव फुले . Jyotirao phule

Share This Post

अम्बेकर ने अपने जीवन काल में तीन लोगों को गुरु माना – पहले थें बुद्ध, दूसरे कबीर और तीसरे थें ज्योतिराव फुले. आज ज्योतिराव फुले का जन्मदिवस है.

महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव  में ज्योतिराव का जन्म एक माली परिवार में होता है, बचपन से ही उन्होंने जातिगत भेदभाव देखा था जिसका असर उनके बाल मन पर गहरा हुआ. इसी दौरान उन्होंने Thomas Paine की किताब Rights of Man जिसने उन्हें संघर्ष का मार्ग दिखाया. समय बीता और ज्योतिराव को समझ आया कि इस जातिवाद से लड़ना है तो उसका एक ही हथियार हो सकता है और वो है शिक्षा.

ऐसे में उनका विवाह महज 13 वर्ष की उम्र में सावित्रीबाई से हो जाती है जोकि उस समय 9 वर्ष की थी. फुले ने पढ़ते हुए रोज अपनी पत्नी को अपने साथ बिठा कर पढ़ाया फिर आता है साल 1848 जब पुणे बुधवार पेठ में इस दम्पत्ति ने लड़कियों के स्कूल की स्थापना की. ऐसा नहीं था कि इससे पहले स्कूल नहीं थे, क्रिस्चन मिशनरियों द्वारा कुछ स्कूल चलाए जा रहे थे लेकिन एक निम्न समझी जाने वाली जाति के व्यक्ति द्वारा खोला जाने वाला यह पहला महिला केन्द्रित स्कूल था।

उस समय सिंथिया फ़रार नामक एक American missionary बोम्बे के अहमदनगर में लड़कियों के लिए स्कूल चलाती थीं जिसे देखकर ज्योतिराव फुले बहुत प्रभावित हुए थें उनहोंने लिखा भी है कि “Once I returned to Pune, I immediately started a school for girls where subjects such as reading, writing, mathematics and grammar were introduced.”

ये स्कूल उस समय खोला गया तब ज्योतिराव फुले 21 साल के और सावित्रीबाई फुले की उम्र महज़ 17 वर्ष की थी जब उन्होंने इस स्कूल में लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया. हालाँकि स्कूल खोलना कोई आसान नहीं रहा. कोई अपनी ज़मीन इस काम के लिए देने को तैयार नहीं था ऐसे में एक ज्योतिबा फुले के मित्र Tatyasaheb Bhide आगे आयें और उन्होंने अपने Bhide Wada जोकि उनका फॅमिली cottage था के दो कमरे स्कूल खोलने के लिए दे दिए.

अगर आप समझते हैं कि सिर्फ शिक्षा और सत्य शोधक समाज का काम इन्होंने किया तो आप गलत हैं. जातिवाद पर प्रहार करने के बाद अगला नम्बर था विधाओं के जीर्णोद्धार का. विधवा पुनर्विवाह और विधवाओं को गंजा किये जाने के खिलाफ मुहीम चलाई. इन्होंने बाल विवाह, अनमेल विवाह मतलब छोटी बच्चियों का वृद्ध पुरुष से विवाह किये जाने का भी जमकर विरोध किया.

 

साहित्य पर भी फुले का अच्छा खासा प्रभाव रहा. इन्होंने lower caste system, women rights और untouchability के खिलाफ जमकर लिखा. इनके सत्य शोधक समाज से एक पत्रिका लगातार प्रकाशित होती थी ‘Deenbandhu’ नाम से जिसका मतलब होता होता है “friend of the poor”. इनकी सबसे ज्यादा चर्चित किताब है ‘गुलामगिरी’ जिसमें lower caste के slavery के historical survey की पड़ताल की गई है.

‘दलित’ शब्द भी फुले द्वारा निम्न समझे जाने वाले शुद्र समाज को दिया गया जिसका वास्तविक मतलब होता है ‘Broken, Crushed’. इन्होंने एक किताब की रचना की जिसका नाम था ‘सार्वजनिक सत्य धर्म’. इस किताब की रचना उन्होंने मराठी भाषा में की ताकि सामान्य मराठीभाषी भी इसे समझ सके. हालाँकि ये उनकी अंतिम रचना रही जिसका प्रकाशन उनके मरणोपरांत हुआ.

 

अभी हाल ही में ज्योतिराव फुले के जीवन पर आधारित एक फिल्म काफी चर्चा में है, ऐसे समय में जब Animal और Kabir singh जैसी फ़िल्में Super Hit हो रही हैं इस तरह के जननायकों पर आधारित फिल्म की काफी आवश्यकता है. अफ़सोस की सेसर बोर्ड को इस फिल्म के कुछ dialogs और seen से दिक्कत हो रही है, सही बात है दिक्कत तो होगी ही सच कहाँ आसानी से हजम होता है. जो इतिहास का हिस्सा है जो सच में हुआ है उसे दिखाने में भी ये लोग दिक्कत कर रहे हैं.

बहरहाल, आज ज्योतिराव फुले के जयंती पर मैंने एक विडिओ बनाया है जिसमें समाज को जो भी योगदान उन्होंने दिया है उसपर सविस्तार चर्चा की है. आप ज़रूर देखें और कमेंट करके बताएं कैसा लगा.

 

 


Share This Post

Also Read .....

  • भारत में यूनेस्को : World Heritage Sites : एक अनमोल धरोहर

    Share This Post

    Share This Postभारत, अपनी समृद्ध संस्कृति, इतिहास और विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां का इतिहास जितना प्रसिद्ध हैं उससे संबंधित ऐतिहासिक धरोहरें भी उतनी ही जीवंत. इसके अलावा यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता भारत की अनोखी पहचान को दर्शाती हैं। यही कारण है कि भारत में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा चयनित कई…


    Share This Post
  • |

    Discover the Best December Winter Travel Destinations in India

    Share This Post

    Share This Postभारत में इतनी विविधता है कि अगर आप साल भर भी घूमते रहेंगे तो भी सबकुछ देख पाना संभव नहीं। खासतौर पर यहाँ सर्दियों में यात्रा के लिए अनगिनत विकल्प खुल जाते हैं। दिसंबर, साल का अंतिम महिना होता है जब सभी लोग चाहते हैं कि साल के आखरी महीने कहीं अच्छी जगह…


    Share This Post
  • Solo Travel in India: Best Destinations, Tips, and Recommendations

    Share This Post

    Share This PostIndia is a land of unparalleled diversity and cultural richness, making it a must-visit destination for solo travelers. From the snow-capped Himalayan peaks to sun-kissed beaches, ancient temples to bustling cities, India offers an array of experiences that cater to all types of travelers. For those wondering how to start solo travel in…


    Share This Post
  • | |

    Durga Puja in Kolkata : Historical Origins

    Share This Post

    Share This Postकोलकाता भारत के सबसे रंगीन और जीवंत शहरों में से एक है। यहाँ का Durga Puja in Kolkata सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि कल्चर, आर्ट, सोशल यूनिटी, पारंपरिक रीति-रिवाज और आधुनिकता का अद्भुत मेल है। इस आर्टिकल में हम देखेंगे कि कैसे कोलकाता में दुर्गा पूजा मनायी जाती है — इतिहास से लेकर…


    Share This Post
  • Jingle All the Way: Best Christmas Places in India

    Share This Post

    Share This Postज़रा एक बार आँख बंद करके imagine कीजिये. हवा में ठंडक, चारों तरफ चमकती तारों वाली रौशनी से सजी सड़कें, रंग-बिरंगे क्रिसमस(Christmas) ट्री, चर्च की घंटी और केक की खुशबू. ये अहसास कितना रोमांचित करने वाला है. यही एहसास आपको भारत के कई सारे चर्चों में क्रिसमस के दिन मिलेगा. क्रिसमस साल को…


    Share This Post
  • | |

    What Makes Bengaluru Special : Silicon Valley of India

    Share This Post

    Share This Postबेंगलुरु(Bengaluru) जिसे भारत की सिलिकॉन वैली(Silicon Valley of India) भी कहा जाता है का जादू आज लगभग सभी युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. आज़ादी से पहले यही जादू कोलकाता का था आज़ादी के बाद दिल्ली, बम्बई का हुआ और आज बेंगलुरु(Bengaluru) का है. कर्नाटक में बसा यह महानगर सिर्फ़ अपनी TI…


    Share This Post

One Comment

  1. Your blog is a constant source of inspiration for me. Your passion for your subject matter shines through in every post, and it’s clear that you genuinely care about making a positive impact on your readers.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *